स्यमन्तक मणि की कथा – एक विस्तृत विवरण
1. मणि का उत्पत्ति और सत्राजित को प्राप्ति
प्राचीन समय में सूर्यदेव ने अपने परम भक्त सत्राजित को एक दिव्य रत्न, स्यमन्तक मणि, प्रदान की। यह मणि न केवल अत्यधिक चमकदार थी, बल्कि प्रतिदिन आठ भार (लगभग 80 किलोग्राम) सोना उत्पन्न करती थी। सत्राजित ने इस मणि को अपने गले में पहन लिया और द्वारका में प्रवेश किया, जिससे सभी लोग चकित हो गए।
2. मणि का चोरी होना और आरोप
सत्राजित ने इस मणि को अपने भाई प्रसेनजित को सौंप दिया। एक दिन प्रसेनजित शिकार के लिए निकला और रास्ते में एक शेर ने उसे मार डाला और मणि को छीन लिया। बाद में, शेर को जामवन्त नामक रीछ ने मारकर मणि को अपनी गुफा में छिपा लिया। जब प्रसेनजित की अनुपस्थिति के कारण सत्राजित ने श्री कृष्ण पर मणि चोरी का आरोप लगाया, तो कृष्ण ने सत्य की खोज में वन यात्रा की। उन्होंने जामवन्त से युद्ध किया और सात दिनों तक संघर्ष के बाद, जामवन्त ने उन्हें पहचाना और मणि को सौंपा।
3. मणि की पुनः प्राप्ति और सत्राजित का पश्चाताप
श्री कृष्ण ने मणि प्राप्त करने के बाद, सत्राजित को शांति दी और मणि को सुरक्षित किया। लेकिन बाद में, शतधन्वा ने सत्राजित की हत्या कर मणि छीन ली। कृष्ण ने शतधन्वा का पीछा किया, लेकिन मणि उन्हें नहीं मिली। इस घटना के बाद, श्री कृष्ण पर मणि चोरी का आरोप लगा। इस आरोप को दूर करने के लिए, नारदजी ने बताया कि कृष्ण ने भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चंद्रमा का दर्शन किया था, जिसके कारण उन्हें यह आरोप सहना पड़ा।
4. श्री कृष्ण पर आरोप और चंद्रमा का शाप
श्री कृष्ण ने मणि प्राप्त करने के बाद, सत्राजित को शांति दी और मणि को सुरक्षित किया। लेकिन बाद में, शतधन्वा ने सत्राजित की हत्या कर मणि छीन ली। कृष्ण ने शतधन्वा का पीछा किया, लेकिन मणि उन्हें नहीं मिली। इस घटना के बाद, श्री कृष्ण पर मणि चोरी का आरोप लगा। इस आरोप को दूर करने के लिए, नारदजी ने बताया कि कृष्ण ने भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चंद्रमा का दर्शन किया था, जिसके कारण उन्हें यह आरोप सहना पड़ा।
5. श्री कृष्ण की सत्यता और मणि का महत्व
श्री कृष्ण ने मणि प्राप्त करने के बाद, सत्राजित को शांति दी और मणि को सुरक्षित किया। लेकिन बाद में, शतधन्वा ने सत्राजित की हत्या कर मणि छीन ली। कृष्ण ने शतधन्वा का पीछा किया, लेकिन मणि उन्हें नहीं मिली। इस घटना के बाद, श्री कृष्ण पर मणि चोरी का आरोप लगा। इस आरोप को दूर करने के लिए, नारदजी ने बताया कि कृष्ण ने भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चंद्रमा का दर्शन किया था, जिसके कारण उन्हें यह आरोप सहना पड़ा।
🕉️ कथा से शिक्षा
यह कथा हमें यह सिखाती है कि:
धार्मिक नियम: पौराणिक कथाओं में बताए नियमों का सम्मान करें।
सत्य की खोज: हमेशा सच का पीछा करना चाहिए।
आरोपों से बचें: बिना प्रमाण के किसी पर आरोप न लगाएं।
